गौरव को १ दिन बेनाम और बिना डाक टिकेट लगा पत्र आया...
शायद गौरव के नाम यह पहली चिट्टी थी... तो वह काफी उत्साहित था... बिना टिकेट के होने के कारण, शायद दोगुनी कीमत दे कर चिट्टी छुडानी पड़ी...
लिफाफे के अन्दर नईदुनिया के संपादकीय की कटिंग थी... जिसका शीर्षक शायद था "आपका इसके बारे में क्या विचार है..." उस संपादकीय में पड़ने लिखने वाले बच्चो पर था...
सभी अचम्भित थे की यह चिट्टी किसने भेजी... फ़िर किसी ने लिफाफे पट डाक घर का ठप्पा पड़ने की कोशिश करी... वह देवास के किसी डाक घर की मुद्रा थी। २-३ दिन पुरानी। तभी किसी का ध्यान गया की सुशिल काका २-३ दिन पहले देवास गए थी... तब जा कर चिट्टी भेजने वाले का पता चला...!
Saturday, August 23, 2008
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