कुछ दिन पहले सूर्य ग्रहण को लेकर समाचार चैनलों पर जो हाय तौबा देखने को मिली, उससे चैनलों के मानसिक दीवालिया पन का पता चलता है. कोई चैनल पंडितो से ग्रहण के कुप्रभावो का विश्लेषण करवा रहा था तो कोई, घर में क्या सावधानी बरतनी चाहिए, इस बारे में सलाह दे रहा थे...
बहराल.. इन्टरनेट पर भटकते भटकते गुलज़ार साहब की कुछ पंक्तिय मिली है ग्रहण पर....
कॉलेज के रोमांस में ऐसा होता था/
डेस्क के पीछे बैठे-बैठे/
चुपके से दो हाथ सरकते
धीरे-धीरे पास आते...
और फिर एक अचानक पूरा हाथ पकड़ लेता था,
मुट्ठी में भर लेता था।
सूरज ने यों ही पकड़ा है चाँद का हाथ फ़लक में आज।।
गुलज़ार...