Friday, March 20, 2009

जबान पकड़ के, कही फिसल न जाए

आज कल जबान फिसलने का मौसम चल रहा है। वरुण गाँधी भावनाओ में बह कर हाथ काटने की बात करता है, तो ओबामा बिना सोचे समझे ख़ुद की बोलिंग कौशल को स्पेशल olympic के खिलाड़ियों से भी बुरी बताते है. अब आदमी वह है जो गलती होने पर मान ले उसके लिए क्षमा मांग ले। और यही मालूम पड़ता है की किस व्यक्ति में कितनी विनम्रता है। ओबामा को ख़ुद की गलती का तुंरत अहसास हो गया और उन्होंने गलती स्वीकार कर ली। पर वरुण भाई यह मानने को तैयार नही की उन्होंने कोई गलती करी है। उल्टा वह मीडिया पर आरोप लगा रहे है की उन्होंने (मीडिया ने) फुटेज के साथ छेड़-छाड़ करी है।
अब प्रजातंत्र ने सब को अपने विचार रखने की छूट दे रखी है। पर इस का मतलब यह नही की जो मन में आया वह बोल दिया। अरस्तु ने कहा था मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। तो जब कोई प्रजातान्त्रिक समाज में रहता है तो क्या बोल रहा है उसका अहसास होना जरूरी है।
पिछले चुनावो में आदरणीय सोनिया जी ने नरेन्द्र मोदी को मौत का सौदागर कहा था। अब यह पता नही की उनकी जबान फिसली थी या वह इस बात में विश्वास करती है की मोदी जो सच में मौत के सौदागर है। पर उन्होंने न तो बयान पलटा और न ही मीडिया पर आरोप लगाया। बड़ी पक्की है सोनिया जी जबान की। जो कह दिया सो कह दिया। पक्के तो अटलजी भी है। भगवान् उन्हें उम्रदराज करे। वे इतना विराम ले कर बोलते थे की जबान फिसलने की गुन्जायिश ही नही रहती थी।
तो वरुण भाई जनता सब जानती है। ज्यादा बहने बनने से ख़ुद की ही मट्टी पालित होगी। अगर आपको लगता है की भावनाओ में बह कर कुछ ग़लत बोल दिया है तो विनम्रता से माफ़ी मांगने में कोई हर्ज़ नही है (अगर ओबामा मांग सकता है तो आप क्यों नही)। और अगर लगता है की कोई ग़लत बात नही करी है तो बहने बजी छोड़ो और जो कहा है उस पर डेट रहो।

वंदे मातरम ।