Friday, June 27, 2008



मांडना, जैसा की इसे मालवा, निमाड और दक्षिण राजस्थान मे कहा जाता है. काफी दिनों से इस तरह के चित्र और आक्र्तियाँ दिमाग मे घूम रही थी, और सोच रहा था की मांडना का इमेज सर्च करू. मैं काफी आशावादी नही था इसे ले कर, पर सर्च रिजल्ट मैं जब पहले पन्ने पर २ मांडने दिखे तो काफी उत्साहित हुआ.. मांडने का चलन शहरों के मुकाबले कस्बो और गावों मैं ज्यादा देखने को मिलता है। शादी ब्याह और तीज त्योहारों (सक्रंती, होली, गणगौर मुख्यतः) मे मांडने घर के आँगन और दीवारों पर मांडे जाते है।
खडिया और घेरू (गेरू), का उपयोग कर विभिन्न आकृतियाँ उकेरी जाती है.

मुझे याद पड़ता है की जब मैं मेरे चाचा और बुआ की शादी मे सीकर, राजस्थान जाता था, तब वहाँ हमारे पुश्तेनी मकान की साफ सफ़ाई के बाद घर के बाहरी दिवार को सजाने के लिए उस पर कुछ आकृतियाँ रंगो से निकलवाई जाती थी, जैसे की मुख्य द्वार के दोनों तरफ़ हवाई जहाज, फूल गिरा कर स्वागत करती महिलाये आदि... उनको मांडना तो नही कह सकते पर दोनों का उद्देश्य एक ही होता है।